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अच्छे दिनों के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी- डॉ. रिखबचंद जैन

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सरकार का व्यवहार उदार न होकर बनिया बुद्धि सा लगता है. जो भी इंसेंटिव्स दिए जाते हैं, उनके साथ कठिन शर्तें लगाई जा रही हैं, ताकि उनका शायद ही कोई फायदा उठा सके. स्टार्टअप स्कीम हो, गारमेन्ट के लिए 6 हजार करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान हो या और कोई स्कीम, इसकी समीक्षा होनी चाहिए.

भारतीय दर्शन में अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चार मनोरथ बताए गए हैं. दीपावली का पर्व महालक्ष्मी पर केन्द्रित होने से इसे धन, समृद्धि, विकास और अर्थव्यवस्था से जुड़ा माना जाता है. भारत के 130 करोड़ नागरिक दीपावली पर लक्ष्मीजी का स्वागत करेंगे. लक्ष्मीजी की कृपा बरसे. लक्ष्मीजी निश्चित रुप से जहाँ जरुरत ज्यादा है, जो जरुरतमंद घर हैं, जहाँ दलित, शोषित, गरीब और पिछडे घर हैं, उन घरों पर ज्यादा कृपा करें. कोई नेता गरीबी भगाये या ना भगाये, लक्ष्मी आने पर गरीबी अपने आप अदृश्य हो जाती है. वैसे दीपावली का संबंध राजा राम के राजतिलक होने और भगवान महावीर के निर्वाण दिवस होने से धर्म के आयाम से भी जुड़ता है. सभी लक्ष्मी भक्त कामनाएं करते हैं, इसलिए ऐश्वर्य और कामनाओं से भी दीपावली जुड़ती है. भगवान महावीर के निर्वाण उत्सव दीपावली पर होने से इस पर्व को मोक्ष या मुक्ति का पर्व भी गिन सकते हैं. दीपावली इस तरह चारों मनोरथ को पूरा करने का संकल्प दिवस है.
दीपावली शुभ हो, मंगलमय हो, इको फ्रेंडली हो तथा पर्यावरण सुरक्षित हो. राजा राम के राजतिलक पर कहीं पटाखे नहीं छूटे थे. पटाखों की शुरूआत 1920 से ही हुई. धर्म और परम्परा से आतिशबाजी का कोई दूर का भी रिश्ता नहीं है. सांस रहती है तो प्राण रहते हैं. सांस रहेगी तो दीवाली मनाओगे. पटाखों के प्रदूषण से सांस लेना दुष्कर होगा, तब यह दीवाली क्या अगली दीवाली भी कैसे मनाओगे? बच्चे, युवक सभी समझें. आतिशबाजी पर न्यायालय कहे या ना कहे, सरकार कहे या ना कहे, स्वयं अपनी सांस बचाने के लिए पटाखा रहित दीपावली मनाएं.
लक्ष्मीजी जानती हैं, कि भारत के नागरिक तीन साल से तो ‘अच्छे दिनों’ का इंतजार कर रहे हैं. अब तो लक्ष्मीजी पर ही भरोसा है. नोटबंदी बड़ा प्रभावी कदम था, लेकिन बैंकिंग सैक्टर ने सबके नोट बदलकर नोट बंदी को ही निष्प्रभावी बना दिया.
लक्ष्मीजी यह भी जानती हैं कि महंगाई घटाने की घोषणाएं तो सिर्फ प्राइवेट सेक्टर के लिए ही होती हैं. सरकार तो अपने कार्यक्षेत्र की सभी वस्तुओं के दाम निरन्तर बढ़ा रही है. डीजल, पेट्रोल, स्कूल फीस, सर्विस टैक्स, पार्किंग फीस, मेट्रो-रेल-बस किराया, प्लेन का किराया, स्थानीय टैक्स, घूस के रेट, दूध-अनाज-तेल के दाम सहित क्या नहीं बढ़ा? घटी तो सिर्फ रुपए की कीमत!
सरकार का व्यवहार उदार न होकर बनिया बुद्धि सा लगता है. जो भी इंसेंटिव्स दिए जाते हैं, उनके साथ कठिन शर्तें लगाई जा रही हैं, ताकि उनका शायद ही कोई फायदा उठा सके. स्टार्टअप स्कीम हो, गारमेन्ट के लिए 6 हजार करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान हो या और कोई स्कीम, इसकी समीक्षा होनी चाहिए.
उदारीकरण के दौर में जो हिन्दुस्तान ने किया, महालक्ष्मी जी चाहेंगी, अब दोबारा वही किया जाये. एक्सपोर्ट, इन्कम टैक्स से माफ हो. किसी भी नई फैक्टरी के प्रॉफिट पर टैक्स पांच साल के लिए माफ हो. नई फैक्टरियों के लिए ऋण पांच साल के लिए माफ हों. पिछड़े क्षेत्रों में यह सीमा सात साल की हो. नये शेयर मार्किट में इंवेस्ट करने पर उसे इन्कम से घटाया जाये. रिन्यूएबल एनर्जी और अन्य रोजगार बढ़ाने वाले गारमेन्ट, लैदरगुड्स और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को अतिरिक्त सुविधाएं दी जायें. कौशल विकास योजनाओं की सफलता के लिए अच्छी योग्यता के ट्रेनर्स चाहिएं. कौशल विकास की योजनाओं को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रभावी ट्रेनर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाया जाये. जीएसटी कानून में टेलीफोन, रेल भाड़ा, प्लेन भाड़ा, ट्रांसपोर्ट इत्यादि के बदले में व्यापारिक संस्थानों को इन्पुट क्रेडिट दी जाती है, उसे ना दें और बदले में आधा प्रतिशत या एक प्रतिशत जीएसटी की दर घटाएं। सरकार पूरे देश के प्रतिष्ठानों का माइक्रो मैनेजमेन्ट कर ही नहीं सकती है. प्रत्येक खर्च के छोटे-छोटे वाउचर को मैच करना या मिलाना लगभग असम्भव ही होगा. उलझन ज्यादा होगी, सुविधा कम. इस सुझाव से टैक्स अथॉरिटीज और जीएसटी प्रतिष्ठानों, दोनों का ही हिसाब-किताब का बोझ घटेगा. इसी तरह अगर रिटेल लेवल पर जीएसटी सरल नियम के अंतर्गत वैट व्यवस्था की तरह रिटेल इन्वॉइस का प्रावधान हो. रिटेल इन्वॉइस वाला खरीददार कोई इन्पुट क्रेडिट नहीं ले सकेगा और उसके बाद वह माल बेचने में बिल, बिना बिल, रिटर्न भरने, हिसाब देना कोई जरुरत ही नहीं होगी.
सरकार के अपने आंकलन के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन और कम्पोजिट स्कीम के अंतर्गत 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिष्ठान आते हैं. ऐसे रिटेल प्रतिष्ठानों की आमदनी पर होने वाले जीएसटी टैक्स को रिटेल इनवॉइस में ही एक्स्ट्रा सरचार्ज लगाकर वसूला जा सकता है. 5 प्रतिशत के स्लैब पर यह सरचार्ज 1 प्रतिशत हो सकता है. इसके ऊपर वालों में 2 प्रतिशत. 18 और उससे ऊपर वाले स्लैब में जीएसटी सरचार्ज पर 3 प्रतिशत हो सकता है. इस स्कीम में रेवेन्यू लॉस नहीं होगा. 90 प्रतिशत व्यापारी वर्ग खुश होगा. व्यापार सरल होगा. सरकार की टैक्स व्यवस्था सुदृढ़ और मजबूत होगी. टैक्स प्रबन्धन भार घटेगा.
मोदी जी, नवभारत निर्माण एवं योगी जी के आदेशों की पालना के लिए प्रशासनिक, पुलिस, राजनैतिक एवं चुनाव सुधार आवश्यक हैं, इनके बिना बदलाव बुलेट स्पीड से असम्भव ही है. इन रिफॉर्म्स को प्राथमिकता मिले.
महालक्ष्मी जी को घर में और राष्ट्र में रखना, विदेशों में जाने से रोकना, यह लक्ष्मी जी का आदेश है. हर नागरिक विदेशी ब्रांड़ से परहेज करेगा और स्वदेशी ब्रांड अपनायेगा। स्वदेशी ब्रांड अपनाने से घर की लक्ष्मी घर पर ही रहेगी. याद रहे विदेशी ब्रांड काम में लेने से आप कितनी ही पूजा करते जाएं, दीवाली में कितने ही खुश होते जाएं लक्ष्मी जी घर में क्या देश से भी बाहर विदेश चली जायेंगी. महात्मा गाँधी जी ने इस तथ्य को 100 साल पहले समझा. प्रत्येक नागरिक को समझाया। देशी रोजगार और व्यापार तभी बढ़ा. अब भी स्वदेशी अपनाने से देश में रोजगार और व्यापार बढ़ेगा.
सरकार, प्रशासन, नेता और जनता लक्ष्मी जी के अर्थव्यवस्था संबंधी आंकलन और समीक्षा पर ध्यान देगें, तो अगली दीपावली तक देश में रोजगार बढ़ेगा, आमदनी बढ़ेगी, महंगाई घटेगी, निर्यात बढ़ेगा, आयात घटेगा. खुशहाली आयेगी. अच्छे ही नहीं बेहतर से बेहतर दिन आयेंगे.
(डॉ. रिखबचंद जैन, अध्यक्ष भारतीय मतदाता संघ)

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