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संघनायक डॉ. धम्म वीरियो, एक महान व अनूठा व्यक्तित्व

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संघनायक डॉ. धम्म वीरियो

 

नई दिल्ली. 10 जुलाई. अखिल भारतीय भिक्खु महासंघ के संघनायक और पूर्व राज्यसभा सदस्य पूज्य भन्ते डॉ. धम्मा वीरियो के आकस्मिक निधन को विश्व हिन्दू परिषद ने भारत के लिए एक महान क्षति बताया है. विहिप के केन्द्रीय मंत्री व विदेश विभाग के प्रमुख प्रशांत हरतालाकर ने अपने समवेदना संदेश में संघनायक को एक महान दिव्य दृष्टा तथा मानव कल्याण में सक्रिय एक प्रमुख कारक बताते हुए उनके मार्ग पर चलने के लिए प्रभु से कामना की है.


डॉ. धम्मा वीरियो का बीती 7 जुलाई, शुक्रवार को दिल्ली के आॅल इंडिया इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज में महानिर्वाण हो गया था. वे 87 वर्ष के थे. सातवीं डॉक्टर वीरियो 2002 से 2006 तक राज्यसभा के सदस्य रहे. डॉ. धम्मा वीरियो अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एवं आदिवासी आयोग के अध्यक्ष तथा भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड के सदस्य भी रहे. शिक्षा जगत में आपका योगदान अम्बेडर केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्य के रूप में सदैव याद किया जाएगा. नालंदा विश्वविद्यालय के भी आप बोर्ड सदस्य रहे.
डॉ. धम्मा वीरियो का जन्म सन् 1929 में म्यांमार बर्मा में हुआ. डॉ. वीरियो एक सेवाव्रती थे. सामाजिक कार्यों की ओर उनकी प्रवृत्ति बाल्यकाल से ही थी. दार्जिलिंग, सिक्किम में आपने 3000 बच्चों के लालन-पालन की व्यवस्था की. आजादी के बाद साठ के दशक में सिक्किम के भारत में विलय में भी डॉ. वीरियो की महती भूमिका रही. वर्ष 2016 में अप्रैल से अक्तूबर तक निरंतर पूरे उत्तर प्रदेश में डॉ. धम्मा वीरियो ने ‘धम्म चेतना यात्रा’ का नेतृत्व करते हुए बौद्ध समाज को राष्ट्र की मुख्य धारा के साथ जोड़ने का सराहनीय कार्य किया.
मात्र बारह वर्ष की आयु में 1941 में भदन्त धम्म वीरियो की मुलाकात बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर से बर्मा में हुई और उनकी प्रेरणा से उन्होंने बौद्ध भिक्षु के रूप में देश-विदेश में बौद्ध धर्म के प्रसार का संकल्प लिया. 1976 में सिक्किम के पहले मुख्यमंत्री काजी लेहनटुप दौरजी के शासन काल में डॉ. धम्मा वीरियो ने सिक्किम में ‘कृपाशरण बुद्धिस्ट मिशन’ की स्थापना की. इस मिशन की आज चार शाखाएं हैं.

 

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