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अंक और रोग तथा चिकित्सा 1

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 जीवन को सुखी व सफलता के लिए व्यक्ति को चाहिए कि सबसे पहले वह अपने शरीर को स्वस्थ रख सके. क्योंकि जीवन में एक मार्ग हो या कोई अन्य चीज, व्यक्ति की मूल दौलत उसका स्वस्थ शरीर ही है. अत: इसका ठीक होना हमारी सफलता की सबसे पहली सीढ़ी है. तो आईये जानते हैं किस जन्मांक वाले व्यक्ति की बीमारियां व उसकी सरल चिकित्सा.

अंक 1
1,10,19,और 28 तारीख में पैदा होने वाले व्यक्ति किसी न किसी रूप से हृदय से संबंधित रोग से पीड़ित होते हैं. इन जातकों के दिल की धड़कन और रक्तप्रवाह अनियमित हो जाता है. बड़ी आयु में रक्तचाप बढ़ जाता है. उन्हें आँखों व दाँतों से संबंधित कष्ट हो सकता है. अत: इन्हें समय-समय पर आँखों का परीक्षण करवाते रहना चाहिए.
चिकित्सा- आपको किशमिश व जौं के पानी का सेवन जरूर करना चाहिए.
विशेष- आपको जनवरी, अक्तूबर और दिसंबर के महीने में स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
अंक 2
2,11,20 और 29 तारीख को पैदा हुए जातकों को पेट अथवा पाचन-तंत्र के रोग हो सकते हैं. साथ ही इनको समय-समय पर मानसिक परेशानी, चिंता, गहन विचार जैसे रोगों का सामना करना पड़ जाता है.
चिकित्सा- तरबूज, सलाद, खीरा आदि का सेवन करें.
विशेष- जनवरी, फरवरी और जुलाई आदि के महीने में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.
अंक 3
3,12, 21 और 30 तारीख को पैदा हुए व्यक्तियों में यह इच्छा होती है, कि वे जो काम कर रहे हैं,उसमें कुछ बच न जाये. इसलिए अधिक कार्य करने के कारण इनके स्नायु-तंत्र पर अधिक जोर पड़ता है. इस कारण इन्हें तंत्रिकाओं में सूजन, सायटिका दर्द और अनेक त्वचा के रोग हो सकते है.
चिकित्सा- चुकंदर, नाशपाती, केसर, अंजीर व पहाड़ी बादाम का सेवन करें.
विशेष- दिसंबर, फरवरी, जून और सितम्बर में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.
अंक 4
4,13, 22, 31 तारीख को पैदा हुए व्यक्तियों को कुछ रहस्यपूर्ण रोग होने का भय रहता है, जिसका निदान होना कठिन होता है. इनको पागलपन, मानसिक अस्वस्थता, रक्त की कमी, सिर, कमर, मूत्रस्थान और गुर्दों में पीड़ा हो सकती है.
चिकित्सा- पालक व हरी सब्जी का प्रयोग ज्यादा उपयोगी हो सकता है. नशीली दवाओं, मसालेदार भोजन और लाल रंग के मांस से परहेज करें.
विशेष- जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त और सितम्बर के महीनों में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.
अंक 5
5,14, और 23 तारीख में पैदा हुए व्यक्ति अधिक तनाव में रहते हैं. ऐसे जातक मानसिक और स्नायविक तनाव में जीने के अभ्यस्त हो जाते हैं. इन्हें आँखों, चेहरे और हाथों के टेढ़े होने का भय बना रहता है. ये अनिद्रा अथवा अधरंग आदि के शिकार हो सकते हैं.
चिकित्सा- आपके लिए सोना,आराम करना और शांत रहना ही सबसे अच्छी औषधियाँ हैं.
विशेष- जून, सितम्बर और दिसंबर के महीने में स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें.
(आचार्य निधि, लेखिका वैदिक ज्योतिषी, वैदिक अंकशास्त्री व टैरो रीडर हैं)
To be continued..

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