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सीलिंग और सियासत

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राजधानी में पिछले दो से ज्यादा महीने से चल रही सीलिंग प्रक्रिया और उस पर हो रही सियासत थमने का नाम नहीं ले रही. हालात इतने बिगड़ गए हैं, कि व्यापारी ‘कटोरा आंदोलन’ चला रहे हैं. इस आंदोलन के जरिए व्यापारियों ने कटोरा लेकर सीलिंग पर रोक लगवाने की भीख मांगते हुए ज्ञापन सौंपा.
क्या है पूरा मामला?
हालांकि राजधानी में सीलिंग का मुद्दा कोई नया मुद्दा नहीं है और इस पर हो रही सियासत की वजह वोट बैंक है. क्योंकि आमतौर पर व्यापारी तबका भाजपा का वोट बैंक माना जाता है. और केंद्र एवं नगर निगम में भाजपा की सरकार होने के बावजूद सीलिंग की कार्रवाई होना भाजपा की विफलता के रूप में दर्ज हो रहा है. सीलिंग की ताजा कार्रवाई 15 दिसंबर से शुरू हुई. एमसीडी के मुताबिक सिर्फ उत्तरी दिल्ली में अब तक 600 से ज्यादा जगह सीलिंग हो चुकी है.
सीलिंग से जुड़ा इतिहास
बात 1984-1985 की है. जब वकील एम.सी मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. उस समय करोल बाग इलाके में स्टोन क्रशिंग का काम होता था. एम.सी. मेहता का तर्क था, कि क्योंकि करोल बाग एक रिहायशी इलाका है और वहां पर स्टोन क्रशिंग के काम के चलते प्रदूषण होता है. जिससे आस-पास रह रहे लोगों को सांस लेने में तकलीफ भी होती है. इसलिए इन इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटीज बन्द होनी चाहिएं. इस मामले में संज्ञान लेते हुए 1987-1988 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दिल्ली में सभी रिहायशी इलाकों से इंडस्ट्रीज को हटा दिया जाए और ऐसा हुआ भी.
सीलिंग के मुद्दे ने 2006 में तब एक बार फिर जोर पकड़ा, जब उच्च न्यायालय ने मिसयूज आॅफ प्रॉपर्टीज वाली सभी दुकानों को सील करने के आदेश दिए. साल 2006 में सीलिंग मामले में बड़ी कार्रवाई हुई, तब भी व्यापारियों ने जमकर हंगामा किया और तब व्यापारियों के गुस्से को शांत करने के लिए नया मास्टर प्लान तैयार किया गया. 2007 में दिल्ली मास्टर प्लान 2021 की अधिसूचना जारी हुई. मास्टर प्लान 2021 में मिक्सड लैंड यूज नीति को लागू किया गया, जिसमें रिहायशी और व्यवसायिक जगहों को एक साथ रहने की इजाजत दी गई. यानी एक ही जगह पर घर और दुकान दोनों चल सकते हैं. तब एमसीडी के एक प्रस्ताव को दिल्ली और केंद्र सरकार से मंजूरी मिली, जिसमें 2,183 सड़कों को नोटिफाई कर व्यवसायिक गतिविधियों को चलाने की इजाजत दी गई. लेकिन इसके लिए कारोबारियों को एक अलग फीस जमा करनी थी. इसी कन्वर्जन्स चार्ज को जब कारोबारियों ने जमा करने से मना कर दिया तो दिसंबर 2017 में दोबारा सीलिंग की कर्रवाई शुरू हुई. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई मॉनिटरिंग कमेटी ने सीधा आदेश दिया कि चार्ज जमा नहीं करने वालों पर गाज गिरेगी.
व्यापारियों को हो रहा नुकसान
जिस दिन से दिल्ली में व्यापारियों की दुकानें सील होनी शुरू हुई हैं, उस दिन से कभी 117 दुकानें, कभी 46 दुकानें तो कभी 105 दुकानें सील होनें की खबरें लगातार छपती रही हैं. एक अनुमान के अनुसार सीलिंग के विरोध में व्यापारिक संगठनों के बंद से 1500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है. इस वजह से सरकार को लगभग 125 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. और 20 लाख लोगों के कामकाज के घंटे भी व्यर्थ हुए. यह भी पढ़ें : मंदिर के जीर्णोद्धार एवं मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन 
जिम्मेदार कौन ?
इस पूरे मामले में एमसीडी, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार तीनों ही जिम्मेदार हैं. 1 जनवरी 2006 में एमसीडी को कहा गया था, कि दिल्ली में जितने भी कमर्शियल नोटिफाइड एरियाज या फिर मिक्स लैंड नोटिफाइड एरियाज हैं, वहां के ट्रेडर्स से पैसा लिया जाए. उस समय इस पैसे को कनर्वजेंट चार्ज का नाम दिया गया और इन पैसों का इस्तेमाल पार्किंग बनाने में किया जाना था. लेकिन ट्रेडर्स से पैसा वसूलने के बावजूद भी एमसीडी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई पाई.
दिल्ली सरकार के पास 351 सड़कों को नोटिफाई करने की जिम्मेदारी है. जिसे कमर्शियल एरिया घोषित किया जाना था, लेकिन उसके लिए भी सुप्रीम कोर्ट की इजाजत चाहिए.
केंद्र सरकार की भी इस मामले में अहम भूमिका है. क्योंकि डीडीए केंद्र सरकार के अंर्तगत आता है और मास्टर प्लान बनाना डीडीए की जिम्मेदारी है. मास्टर प्लान में कोई बदलाव होगा, तभी कमर्शियल एक्टिविटीज की इजाजत दी जा सकती है.
इसी पर अब राजनीति हो रही है और मामला सुलझने के बजाय और उलझता ही जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति की फटकार के चलते बीते मंगलवार को तीनों नगर निगमों को 131 दुकानों एवं मकानों में सिल्ट पार्किंग सील करनी पड़ी. यह कार्रवाई नियमों के दुरुपयोग के चलते की गई. व्यापारियों का प्रदर्शन लगातार जारी है और उन्होंने चेतावनी दी है, कि अगर सीलिंग से जल्द राहत नहीं मिलती है तो प्रधानमंत्री आवास जाएंगे. ऐसे में जरूरी है, कि आपसी झगड़े से निकलकर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को आपसी सहमति व सहयोग से पूरा मामला जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए.
(लेखिका प्रिया सिंह)

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